रसातल में रहनेवाली सुरभि के दूध की धारा से क्षीरसागर उत्पन्न हुआ। क्षीरसागर के तट पर रहने वाले फेनप नामक मुनि जन इसके फेन को पीते रहते हैं।
असूया, अभिमान, शोक, काम, क्रोध, लोभ, मोह, असंतोष, निर्दयता, ईर्ष्या, निंदा और स्पृहा - ये बारह दोष हमेशा त्यागने योग्य हैं। जैसे शिकारी मृगों का शिकार करने के अवसर की तलाश में रहता है, इसी तरह, ये दोष भी मनुष्यों की कमजोरियाँ देखकर उन पर आक्रमण कर देते हैं।
योगेश्वरी गौरी का मंत्र
ॐ ह्रीं गौरि रुद्रदयिते योगेश्वरि हुं फट् स्वाहा....
Click here to know more..वरुण सूक्त
उदु॑त्त॒मं व॑रुण॒पाश॑म॒स्मदवा॑ध॒मं विम॑ध्य॒मꣳ श्र॑था....
Click here to know more..कुंज बिहारी स्तुति
कवलित इव राधापाङ्गभङ्गीतरङ्गैः । मुदितवदनचन्द्रश्चन्�....
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